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वाजपेयी की 95वीं जयंती पर सुनिए उनके 5 बड़े फैसले

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वाजपेयी की 95वीं जयंती पर सुनिए उनके 5 बड़े फैसले

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने पांच दशक के सियासी सफर में कई उतार- चढ़ाव भरे दौर देखे. वाजपेयी की आज 95वीं जयंती है. इसी साल 16 अगस्त को उनका निधन हो गया था, लेकिन अपनी राजनीतिक जिंदगी में उन्होंने बीजेपी की नींव रखने से लेकर शिखर तक पहुंचाया. वाजपेयी ने पीएम रहते हुए कई बड़े और कड़े कदम उठाए थे, जिन्हें बीजेपी नए भारत की तस्वीर के रूप में पेश करती है. हालांकि, उनके कुछ निर्णय विवादों में भी रहे. आइए, ऐसे कुछ फैसलों पर नजर डालें. पहला है स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, इस योजना की शुरुवात वाजपेयी जी ने एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ने के लिए की थी. दूसरा है पोखरण का परमाणु परीक्षण | यह वाजपेयी के सबसे कड़े और ऐतिहासिक फैसलों में से एक है. वाजपेयी ने 1998 में पोखरण में 2 दिन के अंतराल में 5 परमाणु परीक्षण करके सारी दुनिया को चौंकाया था.तीसरा है सर्व शिक्षा अभियान| यह अभियान इनकी सरकार के सबसे सफल सामाजिक अभ‍ियानों में से एक था| इसके जरिये सरकार ने 6 से 14 साल की उम्र के बच्चों को मुफ्त प्राथमिक श‍िक्षा देने का प्रावधान किया था.चौथा है दिल्ली-लाहौर के बीच 1999 में बस सेवा शुरू करना. इतना ही नहीं, करगिल में आतंकियों की घुसपैठ के बाद जुलाई 2001 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ आगरा में शिखर बैठक करने का फैसला भी वाजपेयी का काफी मुश्किलों भरा था. और पांचवां है कंधार में आतंकियों को छोड़ना| 24 दिसंबर, 1999 को आतंकियों ने इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी-814 को हाईजैक कर लिया था और 35 उग्रवादियों की रिहाई के साथ 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग की थी| पर सरकार इस पर राजी नहीं हुई और बाद में तीन आतंकियों को छोड़ने पर सहमति बनी और फिर प्लेन को छोड़ाया गया|

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