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अन्ना-मोदी सरकार ने लोकपाल कानून के साथ की धोखाधड़ी

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अन्ना-मोदी सरकार ने लोकपाल कानून के साथ की धोखाधड़ी

समाजसेवी अन्ना हजारे ने लोकपाल की मांग को लेकर एक बार फिर आमरण अनशन शुरू कर दिया है. 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे ने 13 दिनों का अनशन किया था. तब उनकी लड़ाई कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के खिलाफ थी, इस बार यह लड़ाई भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के खिलाफ है. उनका कहना है कि बीजेपी समेत अब कोई भी बड़ा दल लोकपाल पर बात नहीं करता.मैंने अपना जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया है. एक लड़ाई पकिस्तान के साथ लड़ी और ये लड़ाई देश में छुपे हुए दुश्मनों से जारी है. जब पूछा गया कि पिछले आंदोलन से कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी. 2013 के आंदोलन से बीजेपी को फायदा हुआ, इस पर अन्ना ने कहा कि पिछली बार आंदोलन कानून बनाने के लिए था और कानून बना फिर केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आ गई. सरकार में आने के बाद मोदी सरकार ने लोकपाल कानून के साथ कैसे धोखाधड़ी की यह बताते हुए अन्ना ने कहा, मोदी सरकार ने लोकपाल नियुक्त करने के बजाए, लोकपाल कानून में एक संशोधन पेश कर दिया. लोकपाल कानून में नियम था, जिसके तहत सरकारी अधिकारी और उसके पत्नी को हर साल 31 दिसंबर तक अपनी प्रॉपर्टी का ब्यौरा देना अनिवार्य था, लेकिन मोदी सरकार ने यह नियम निकाल दिया यानी भ्रष्टाचार का रास्ता खोल दिया.

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