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स्पेशल: निद्रा दान - सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए

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स्पेशल: निद्रा दान - सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए

आज के भागम भाग जिंदगी में आए दिन सड़क दुर्घटनाए की खबरे हम सुनते आ रहे है| ये दुर्घटनाए ज्यादातर भारी ट्रको के कारण होती है| राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, 2014 में देश में करीब साढ़े चार लाख सड़क हादसे हुए. इनमें 34,252 ड्राइवर मारे गए और 94,272 घायल हुए. इतना ही नहीं, इन हादसों में दूसरे 1,07,274 लोग मारे गए तो 3,83,459 घायल हुए. इसी तरह ट्रक/लॉरी हादसों में कुल 28,455 लोग मारे गए, जिनमें 5,610 ड्राइवर थे.पर क्या किसी ने ये सोचा कि इन दुर्घटनाओं का प्रमुख कारन क्या है? दरसल इन सड़क हादसों का प्रमुख कारण है ड्राइवरों की नींद पूरी नहीं होना. इसी को ध्यान में रखते हुवे अग्रवाल पैकर्स ऐंड मूवर्स के चेयरमैन रमेश अग्रवाल ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अनूठी पहल की| उन्होंने सीएसआर के तहत दूदू के पास सितंबर, 2012 में ड्राइवर सेवा केंद्र खोला. इस केंद्र के विचार की कहानी भी दिलचस्प है. दरअसल, अग्रवाल 2007 में इंटरनेशनल रोड यूनियन की बैठक में इस्तांबुल गए थे. वहां उन्हें बताया गया कि सड़क हादसों में भारत बहुत आगे है. यह सुनना उन्हें बुरा लगा और वहां से लौटने पर उन्होंने इस पर काम करना शुरू किया. जब उन्हें पता चला कि हादसों की एक बड़ी वजह ड्राइवरों की नींद पूरी न होना है. वे घंटों बिना नींद पूरी किए गाड़ी चलाते हैं. तो इस पर उन्होंने सोचा, नींद वाली कमी खत्म की जा सकती है.' इसी कड़ी में अग्रवाल ने अपने ड्राइवरों को कहा कि वे नींद पूरी कर लिया करें पर उनका जवाब था, 'सर, नींद हम कहां पूरी करें? गाड़ी कहीं खड़ी करके सोते हैं तो डीजल, गाड़ी पार्ट्स चोरी हो जाते हैं.' ड्राइवर की यह बात सुन उन्होंने सोच लिया कि ड्राइवरों के लिए निद्रा दान केंद्र खोला जाए.' उन्होंने पता किया कि ज्यादातर हादसे किस ओर होते हैं. फिर उन्होंने एनएच-8 को चुना और दूदू के पास केंद्र खोलना तय किया. अच्छी बात यह है कि यह केंद्र केवल अग्रवाल पैकर्स ऐंड मूवर्स के ड्राइवरों के लिए ही नहीं, बल्कि किसी भी कंपनी के ड्राइवर यहां आराम कर सकते हैं. यहां पांच बड़े कमरे हैं, जिनमें दो ड्राइवरों के सोने के लिए हैं. उनमें दर्जनों चारपाइयां बिछी हुई हैं. इसके अलावा परिसर में ही एक ढाबा, दर्जी की दुकान, नाई की दुकान और एक और शेड कमरा है, जिसका इस्तेमाल भी ड्राइवर सोने के लिए करते हैं. कंपनी ने ढाबा मालिक, दर्जी और नाई को मुफ्त में कमरा दे रखा है. नाई की सेवा यहां मुफ्त हैं. इतना ही नहीं इस सेवा केंद्र में ड्राइवरों को सम्मान के साथ उनका स्वागत किया जाता है और पीतल की थाली में इत्र डालकर उनका हाथ पैर धुलवाई जाती है|और फिर भरपेट खाना खिलाकर सुलाया जाता है| सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ ड्राईवर को न तो चोरी का डर होता है और न ही दिमागी तनाव| इस केंद्र के इंचार्ज एक. के. जोशी ने बताया, 'शुरू में ड्राइवरों को इससे जुडऩे में वक्त लगा था. लेकिन अब यहां रोजाना करीब 70-80 ड्राइवर अपनी नींद पूरी करते हैं. यहां कंपनी की 130 बीघा जमीन है, जिसमें करीब 26-27 बीघे में निर्माण हो चुका है. इसके अलावा महाराष्ट्र के मलकापुर में भी कंपनी ड्राइवर सेवा केंद्र खोलने जा रही है. इससे ड्राइवरों की नींद पूरी होगी और असल सफर सुरक्षित हो जाएगा.

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