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विशेष रिपोर्ट-कांग्रेस के लिए लकी कौन, बस या प्रियंका?

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विशेष रिपोर्ट-कांग्रेस के लिए लकी कौन, बस या प्रियंका?

कांग्रेस की नवनियुूक्त महासचिव प्रियंका वाड्रा सोमवार 11 फरवरी को उत्तर प्रदेश की राजधानी में थीं । उनका यूपी आना कोई नई बात नहीं है ,वो अक्सर आती रहती हैं क्योंकि सोनिया गांधी की संसदीय सीट रायबरेली और राहुल गांधी की संसदीस सीट अमेठी की देखरेख का जिम्मा उनके पास ही रहा है । हां ये पहली बार है कि पार्टी में बड़ा पद मिलने के बाद वो पहली बार आई। आना भी पूरे तामझाम के साथ हुआ । प्रियंका ,भाई राहुल गांधी और अन्य नेताओं के साथ उस बस पर सवार थी जिसका इस्तेमाल कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव में किया था । कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इसी बस पर बैठ कर प्रचार किया था । केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद पंजाब पहला ऐसा राज्य था जहां कांग्रेस जीती थी और उसकी सरकार बनी थी । कांग्रेस इस बस को लकी मानती है । संभवत: यही कारण है कि प्रियंका के यूपी आने पर इसी बस का इस्तेमाल किया गया ।प्रियंका के रोड शो में अच्छी भीड़ दिखाई दी । ये प्रियंका का स्टारडम है जिसने भीड़ को सड़कों पर खींच लिया । कांग्रेस के लोग बहुत पहले से प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग करते रहे हैं । वो लोगों से राहुल की अपेक्षा ज्यादा सही तरीके से कनेक्ट करती हैं । राहुल 2004 में सांसद बने थे और अब कांग्रेस के अध्यक्ष हैं लेकिन वो क्या कहना चाहते हैं ,शायद ये उनको भी पता नहीं होता। राफेल पर चौकीदार चोर है के बाद उनको बस एक लाईन याद है,, कांग्रेस फ्रंट फुट पर खेलेगी,,। फ्रंट फुट शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर क्रिकेट के लिए किया जाता है । बल्लेबाज गेंद की लाईन और दिशा देख कर फ्रंट फुट या बैक फुट का इस्तेमाल करता है । दुनियां को जाने दें भारत में ही बैक फुट के कई उम्दा खिलाडी हुए हैं । इसीतरह राजनीति के खेल में भी कभी कभी बैक फुट पर आना होता है ।अक्सर फ्रंट फुट पर खेलने वाले खिलाडी जीरो पर आउट होते देखे गए हैं । प्रियंका के पास करिश्माई व्यक्तित्व तो है लेकिन मैदान में लड़ने वाले खिलाडी नहीं ।कांग्रेस यूपी में अपनी जमीन गंवा चुकी है । कार्यकर्ता या तो बचे नहीं और जो बचे उनमें उत्साह नहीं । साल 1984 में राज्य की 85 सीटों में मात्र दो सीट गंवाने वाली कांग्रेस बस दो सीट पर ही सिमट के रह गई है ।दो सीट भी सोनिया और राहुल गांधी की हैं । हालांकि राहुल,यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के खिलाफ कुछ भी बोलने के अबतक परहेज करते रहे हैं ,क्योंकि उनको भरोसा है कि लोकसभा चुनाव के बाद शायद ऐसी स्थिति आ सकती है कि दोनों दलों की जरूरत पड़े । कांग्रेस नेतृत्व भी जानता है कि प्रियंका के लिए समय कम है । इसीलिए उन्हें 2019 से ज्यादा 2022 के विधानसभा चुनाव पर ध्यान देने को कहा गया है । लगभग तीस साल से यूपी की सत्ता से बाहर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल दावा करते हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की सरकार बनेगी । हालांकि राजनीतिक पंडित मानते हैं कि प्रियंका का व्यक्तित्व आकर्षक है और वो अपनी बात बेवाकी से रखती हैं लेकिन वो बहुत कुछ कर पायेंगी इसमें संदेह है क्योंकि रायबरेली और अमेठी की दस विधानसभा सीट पर कांग्रेस बस दो सीट पर ही जीत सकी है । इन दो संसदीय सीट की दस विधानसभा सीट पर प्रत्याशी चयन से लेकर पूरे इंतजाम की जिम्मेवारी प्रियंका के पास ही थी लेकिन वो नतीजा कांग्रेस के पक्ष में नहीं ला पाईं । प्रियंका के पास खोने को कुछ नहीं है लेकिन पाने को पूरा यूपी है । इसीलिए उन्हें लोकसभा की 40 से ज्यादा सीटों की जिम्मेवारी दी गई है । बस चार महीने और इंतजार करें ,लोग गांधी नेहरू परिवार की इस बेटी को कितना पसंद करते हैं ,पता चल जायेगा ।

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