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विश्व रेडियो दिवस : सुनहरे सफर के स्मरण का दिन

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विश्व रेडियो दिवस : सुनहरे सफर के स्मरण का दिन

आज यानी 13 फरवरी को पूरे विश्व में रेडियो दिवस मनाया जा रहा है। इंटरनेट, मोबाइल और टेक्नोलॉजी के इस दौर में रेडियो सुनने वालों की दीवानगी आज भी बरकरार है. रेडियो की इतनी प्रासंगिकता है कि आज भी काफी लोग इससे जुड़े हैं. समय के साथ रेडियो के स्वरूप में बदलाव जरूर आया, पर इसकी लोकप्रियता आज भी बरकार है. यह आज भी संचार का सबसे सस्ता और सुलभ माध्यम है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. यह दुनिया का सबसे सुलभ मीडिया है. जिस पर दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर आसानी से देश दुनिया कि खबरे और मनोरंजन सुना जा सकता है. पढ़े-लिखे हो या अनपढ़, आज सभी रेडियो से जुड़े हुवे हैं. विश्व रेडियो दिवस मनाने की शुरूआत हाल ही में की गयी. रेडियो की महत्ता को रेखांकित करते हुए संयुक्त राष्‍ट्र संघ ने “विश्व रेडियो दिवस” की शुरुआत 13 फरवरी 2012 को की। जो अब भारत समेत विश्व भर में मनाया जाता है। अगर हम भारत के प्रसारण इतिहास में जाएं तो हमें पता चलता है कि भारत में पहला रेडियो प्रसारण 20 अगस्त 1921 में हुआ था। इसी दिन को आधार मानकर-भारत में हर वर्ष श्रोता-दिवस मनाने का सिलसिला-2006 में छत्तीसगढ़ से शुरू हुआ, जो लगातार जारी है, अब ये दिवस, पूरे भारत में मनाया जाता है। दो वर्ष पहले ये ‘अकोला महाराष्ट्र’ में और पिछले वर्ष अखिल-भारतीय-स्तर पर..ये मध्यप्रदेश के-खंडवा में, आयोजित किया गया था। रेडियो-श्रोता-दिवस” मनाने का मक़सद-साल में कम से कम एक दिन-रेडियो प्रसारकों, श्रोताओं, रेडियो स्टेशनों एवं रेडियो से जुड़ी-अन्य संस्थाओं को, एक मंच प्रदान करना है, ताकि रेडियो को आपसी विचार-परामर्श द्वारा और बेहतर बनाया जा सके।

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