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दुखद:कलाइयों की घड़ियां,जेब के पर्स से हुई जवानों की पहचान

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दुखद:कलाइयों की घड़ियां,जेब के पर्स से हुई जवानों की पहचान

जम्मू-कश्मीर में शहीद 40 सीआरपीएफ जवानों के पार्थिव शरीर को उन गांवों-घरों की ओर भेज दिया गया, जहां उनका जन्म हुआ था, जहां वो पले-बढ़े थे. आज जब तिरंगे में लिपटे इन जवानों का शव इनके घर पहुंच रहा है तो इन शवों की हालत को देख लोगों के मन में घोर गुस्सा भरा है. हमले की चपेट में आए जवानों के शरीर का वो हाल हो चुका है जिसे बता पाना मुश्किल है. शवों का हाल देखकर इनकी पहचान करना सीआरपीएफ जवानों के लिए बेहद मुश्किल था. लगभग 200 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल कर किए गए इस फिदायीन हमले के बाद शवों की हालत बेहद बुरी हो गई थी. कहीं हाथ पड़ा हुआ था तो कहीं शरीर का दूसरा भाग बिखरा हुआ. जवानों के बैग कहीं और थे तो उनकी टोपियां कहीं और बिखरी हुई थी. हमले के तुरंत बाद ये इलाका युद्ध भूमि जैसा दिख रहा था. शरीर के इन अवशेष और सामानों को एक साथ इकट्ठा करने के बाद इनकी पहचान का काम शुरू हुआ. सूत्रों के मुताबिक इस काम में जवानों के आधार कार्ड, आईडी कार्ड और कुछ अन्य सामानों से बड़ी मदद मिली. शवों की शिनाख्त के कुछ मामले तो बेहद दर्द भरे हैं. कई जवान घर जाने के लिए छुट्टी का आवेदन लिखकर आए थे. इस आवेदन को वह अपने बैग में या पॉकेट में रखे थे इसी के आधार पर उन्हें पहचाना जा सका. कईयों की पहचान उनकी कलाइयों में बंधी घड़ियों से हुई. ये घड़ियां हमले में बचे उनके साथियों ने पहचानी. कई जवानों की पहचान उनके पॉकेट में रखी पर्स के आधार पर हुई. इन तमाम कोशिशों के बाद भी कुछ शवों के पहचान में बेहद दिक्कत हुई. इनकी पहचान के लिए तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया.

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