content-cover-image

Special: देश का पहला वॉर मेमोरियल, जानिए सब-कुछ

मुख्य खबरें

00:00

ट्रेंडिंग रेडियो

Special: देश का पहला वॉर मेमोरियल, जानिए सब-कुछ

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेशनल वॉर मेमोरियल को देश के नाम समर्पित कर दिए। सायद आपको याद होगा की प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान एक वॉर मेमोरियल बनाने का वादा किया था। लेकीन आप ये जान कर और आश्चर्य होंगे कि यह वॉर मेमोरियल २०१४ से नहीं बल्कि १९६० से बनाने के लिए कहा जा रहा है| दरअसल पहली बार 1960 में नेशनल वॉर मेमोरियल बनाने का प्रस्ताव सेनाओं की ओर से दिया गया था। लेकिन कुछ वजहों से इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका और अक्‍टूबर 2015 में जाकर केंद्र सरकार ने इस वॉर मेमोरियल की मंजूरी दी। अब थोडा पीछे चलते है बात करते है ब्रिटिश शासन की, उस दौरान सन् 1931 में इंडिया गेट का निर्माण हुआ जिसे पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था। इसके बाद सन् 1971 के युद्ध में शहीद हुए 3843 सैनिकों के सम्मान में अमर जवान ज्योति की स्थापना की गई जो अभी तक जल रही है। अब इसी कड़ी में नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया गया है| पहले इसको गणतंत्र दिवस के पहले खोलने का प्‍लान था लेकिन सरकार ने इसमें बदलाव कर दिए। जिस वजह से इसका उद्घाटन आज किया गया| इसके बाद यह आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा| तो चलिए जानते है भारत के लिए इस वॉर मेमोरियल की क्‍या अहमियत है और इसकी क्‍या खासियत हैं। भारत में यह पहला ऐसा वॉर मेमोरियल है जहां आजादी के बाद हुए हर युद्ध के शहीदों के नाम दर्ज हैं। अभी तक देश में इस तरह का कोई भी वॉर मेमोरियल नहीं था। इसको 25,942 सैनिकों की याद में बनाया गया है। इंडिया गेट के करीब स्थित इस वॉर मेमोरियल पर जिन युद्ध या खास ऑपरेशन में शहीद हुए सैनिकों के नाम दर्ज हैं उसमें 1947-48 में गोआ क्रांति , 1962 में चीन के साथ हुआ युद्ध, 1965 और 1971 में पाकिस्‍तान के साथ हुए युद्ध के अलावा 1987 में सियाचिन पर चले संघर्ष, 1987-1988 में श्रीलंका में चलाए गए ऑपरेशन पवन और 1999 में कारगिल युद्ध के शहीदों के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा कुछ और ऑपरेशन जैसे ऑपरेशन रक्षक के बारे में भी यहां पर जानकारियां और इसमें शहीद हुए सैनिकों के नाम दर्ज किए गए हैं। इस मेमोरियल को तैयार करने में करीब 500 करोड़ रुपए का खर्च आया है और अगर अमेरिकी डॉलर में इसकी तुलना करें तो यह राशि 70 मिलियन डॉलर है। नेशनल वॉर मेमोरियल भारतीय सैनिकों के सम्‍मान में बना है जिन्‍होंने आजादी के बाद हुए युद्ध में अपने प्राण गंवा दिए थे। यह इंडिया गेट के सी-हेक्‍सागॉन में स्थित है जो की 40 एकड़ में बना है और यहां पर एक वॉर म्‍यूजियम भी है। वॉर मेमोरियल के चारों ओर अमर, वीर, त्‍याग और रक्षा के नाम से सर्किल्‍स बने हुए हैं। यहां पर परमवीर चक्र विजेताओं के बस्‍ट भी लगे हुए हैं। यहां स्मारकों के साथ संग्रहालय भी बनाया गया है। दोनों के बीच एक सब-वे भी रखा है। मेमोरियल के चारों ओर सफेद दूधिया लाइटें भी लगाई गई हैं। विजय चौक से इंडिया गेट और नेशनल वॉर मेमोरियल के दृश्य को देखा जा सकता है। मेमोरियल में कुछ दीवारों पर कुछ पुरानी तस्वीरें लगाई गई हैं। वहीं कुछ दीवारों पर युद्ध की कलाकृतियां देखने को मिलेंगी। सियाचिन सहित कारगिल के दौरान टाइगर हिल पर कब्जा इत्यादि लम्हें कैद करने वाली तस्वीरें भी देखने को मिलेंगी। नेशनल वॉर मेमोरियल काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इसलिए एक सुविधा फोन एप की भी रखी गई है। इस एप के जरिए शहीद का नाम टाइप करने पर उसका स्मारक कहां पर है, उसकी लोकेशन आपके फोन में पता चलेगी। नेशनल वॉर मेमोरियल में चार चक्र बनाए गए हैं। . जल, थल और वायु सेना के शहीदों के नाम एकसाथ। . अमर चक्र पर 15.5 मीट ऊंचा स्मारक स्तंभ बना है, जिसमें अमर ज्योति जलेगी। . वीरता चक्र में छह बड़े युद्धों के बारे में जानकारी दी है। . त्याग चक्र में 2 मीटर लंबी दीवार पर 25,942 शहीदों के नाम। . 690 पेड़ों के साथ सुरक्षा चक्र भी दिखेगा। . हर शाम सैन्य बैंड के साथ शहीदों को सलामी दी जाएगी। . इंडिया गेट की तरह मेमोरियल में भी होगी अमर ज्योति। . पर्यटकों के लिए प्रवेश निशुल्क रहेगा। . हर सप्ताह रविवार को चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी देखने का मौका। मेमोरियल के खुलने-बंद होने का समय kuch is prakar rahega.. अप्रैल से अक्तूबर : सुबह 9 से शाम साढ़े 7 बजे तक। नवंबर से मार्च तक : सुबह 9 से शाम साढ़े 6 बजे तक। श्रोतावों ये थी नेशनल वॉर मेमोरियल से जुडी कुछ खास जानकारी| आशा है आपको पसंद आई होगी| aapke sath ye jankari sanjha karte hue mera mann kar raha hai ki main abhi ke abhi is memorial ko dekhne chali jaaon. Doston kya aap mauka milne par jald hi is memorial ko dekhne jayenge? ऐसी ही कुछ खास जानकारियों के साथ जुड़े रहे खबरी के साथ|धन्यवाद

Show more
content-cover-image
Special: देश का पहला वॉर मेमोरियल, जानिए सब-कुछमुख्य खबरें