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उस्ताद जाकिर हुसैन की शिव साधना

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उस्ताद जाकिर हुसैन की शिव साधना

उस्ताद जाकिर हुसैन भारत भवन में थे और उनका तबला शिवधाम यानी कैलाश में। कैलाश की रचना ध्वनि रूप में कैसी रही होगी, जैसा उस्ताद अल्लारखा बताते थे, वैसा ही जाकिर ने भी जीवंत किया। पहले उस्ताद की उंगलियों ने शिव तांडव रचा। फिर तांडव के ‘ता’ और उसे शांत करने के लिए गौरी के लास्य नृत्य का ‘ल’ लेकर ताल का उद्गम बताया। तांडव के दौरान तबला में बजा डमरू। पहले धीरे-धीरे। फिर गड़गड़ाहट के साथ। बीच-बीच में जब शंख की ध्वनि उठी तो लगा, वहां बैठे लोग भारत भवन में नहीं, कैलाश पर ही हों।

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