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हाइवे सील करने के फैसले पर तिलमिलाए सियासी दल

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हाइवे सील करने के फैसले पर तिलमिलाए सियासी दल

जम्मू कश्मीर में जम्मू-श्रीनगर-बारामूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षाबलों के काफिले का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने को लेकर सप्ताह में दो दिन आम नागरिकों की आवाजाही पर रोक रविवार से अमल में आ गई। रविवार को इस फैसले के खिलाफ विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने विरोध-प्रदर्शन कर नाराजगी जताई। पीडीपी के वरिष्ठ नेता तथा विधान परिषद के पूर्व सदस्य फिदौस अहमद ताक को प्रतिबंध का उल्लंघन करने के आरोप में समर्थकों के साथ किश्तवाड़ जिले में कुछ वक्त के लिए हिरासत में लेकर रिहा कर दिया गया। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष ने प्रतिबंध को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा, ‘यह एक गलत आदेश है। उन्हें सुरक्षा कर्मियों की आवाजाही के लिए ट्रेन का इस्तेमाल करना चाहिए या वे रात के समय निकले ताकि लोगों को इससे परेशानी ना हो।’ वही पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘यह बेहद गलत है। वहां हमारी कोई व्यावसायिक सेना नहीं है। अगर भारत सरकार को लगता है कि इस तरह के हथकंडे अपनाकर वे यहां के लोगों को दबा सकते हैं, तो वे गलत हैं।’ पीपुल्स कॉन्फ्रेंस पार्टी के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘राजमार्ग पर रोक अब मानवीय आपदा में बदल रही है...राज्यपाल को अमानवीय आदेश को तत्काल रद्द करने की जरूरत है।’ बता दे कि उक्त फैसला 14 फरवरी को पुलवामा जिले के राजमार्ग पर हमले के बाद लिया गया है, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

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