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Notre-Dame Cathedral हादसा, ऐतिहासिक काला दिन

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Notre-Dame Cathedral हादसा, ऐतिहासिक काला दिन

फ्रांस की राजधानी पेरिस में सीन नदी के तट पर स्थित 850 साल पुराना मशहूर चर्च नॉत्र डाम कैथेड्रल , जिसे लेडी ऑफ पेरिस भी कहा जाता है; भीषण आग के बाद पूरी तरह से बर्बाद हो गया।इसमें सोमवार को आग लग गई, हालांकि मुख्य ढांचे को बचा लिया गया है लेकिन आगजनी से ऐतिहासिक इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और सदियों की विरासत खाक हो गई। दमकल विभाग के करीब 400 कर्मियों ने काफी मशक्कत की और वे काफी नुकसान के बावजूद आगे के टावर बचाने में कामयाब रहे। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए नोट्रे-डेम का फिर निर्माण कराने का संकल्प लिया है। इस ऐतिहासिक चर्च के पुनर्निर्माण के लिए फ्रांस के अरबपति से लेकर कारोबारी और निजी-सरकारी कंपनियां दिल खोलकर मदद का एलान कर रही हैं। आग में सबसे पहले यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित 850 साल पुरानी छत तबाह हुई, और शानदार गॉथिक मीनार वहां मौजूद लोगों के सामने ढह गई। आग ऐसे समय में लगी है जब गिरजाघर में ईस्टर की तैयारियां की जा रही थीं। आग इतनी भयावह थी कि इसकी लपटे आसमान तक उठ रही थी, जिसे वहां मौजूद पर्यटक देख सन्न रह गए। उप गृहमंत्री लॉरेंट नुनेज मौके पर पहुंचे और बेहद सावधानी बरतने का आग्रह किया. पेरिस अभियोजक कायार्लय ने आग के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि नोट्रे डेम कैथेड्रल सैकड़ो वर्ष पुरानी ईमारत है और हर वर्ष इस ईमारत को कई पर्यटक देखनेआते हैं, हर साल लगभग 1.2 करोड़ लोग। फ्रांस के महान शासक नेपोलियन बोनापार्ट की ताजपोशी और उनके विवाह यानी Napoleon Bonaparte Wedding सहित कई युद्धों एवं क्रांतियों का गवाह बने नोट्रे-डेम Church को न केवल गॉाथिक कला की सर्वश्रेष्ठ कलाकृति का नमूना माना जाता है. बल्कि पाश्चात्य जगत की वास्तुकला के सर्वश्रेष्ठ रत्न के रूप में इसकी पहचान संसार भर में बनी हुई है. नोट्रे डेम का निर्माण 1160 से शुरू हुआ था, जो कि 1260 तक चला। फ्रेंच गॉथिक आर्किटेक्ट का यह नायाब नमूना 69 मीटर ऊंचा है। इसके शिखर तक पहुंचने के लिए 387 सीढि़यां चढ़नी पड़ती है। इस चर्च की भित्तियां बोनापार्ट की 1804 में यहां हुई ताजपोशी और फिर 1810 में उनकी शादी का भव्य समारोह की गाथाएं सुनातीं हैं. इतिहास के चंद लम्हों को खुद में समेटने वाली यह भव्य इमारत महज यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि युगों की प्रतिध्वनि इसमें देखीसुनी जा सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कई सदियों की कला संगम है. मध्ययुगीन कला की मर्मज्ञ एवं ‘मेट क्लोइस्टर्स' में शिक्षक नैन्सी वू ने कहा कि इसके निर्माण में विभिन्न युगों का सौंदर्य आपस में घुला हुआ है. इनका मिश्रण बहुत ही अधिक माधुर्य से परिपूरित है.अब इस अनूठे गिरजाघर में 15 अप्रैल को हुए भयावह अग्निकांड से इस इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है. इससे कला के जानकारों और इतिहासकारों को गहरा सदमा पहुंचा है. ऐसा माना जाता है कि ईसा मसीह से लेकर नेपोलियन तक का है इससे संबंध है. इस चर्च के नष्‍ट होने से माना जा रहा है कि एक युग का भी अंत हो गया।

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