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Chunav Spl: मधेपुरा का कुरुक्षेत्र- 3 यादवों में मुकाबला

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Chunav Spl: मधेपुरा का कुरुक्षेत्र- 3 यादवों में मुकाबला

लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण में बिहार की पांच सीटों पर मदतान होना है. इसमें झंझारपुर, सुपौल, अररिया, मधेपुरा और खगड़िया शामिल है| इन्ही पांच सीटों में एक लोकसभा सीट मधेपुरा का भी है. यह सीट इस बार भी बिहार के हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है. इस संसदीय क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- आलमनगर, बिहारीगंज, मधेपुरा, सोनबरसा, सहरसा और महिषी। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 6 सीटों में से 3 पर जेडीयू और 3 पर आरजेडी की जीत हुई थी. इस सीट को आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव का गढ़ माना जाता है| इस बार इस सीट से कुल 13 प्रत्याशी मैदान में हैं| इनके नाम है- जाप से पप्पू यादव राजद से शरद यादव जदयू से दिनेशचंद्र यादव राजप(राष्ट्रवादी जनता पार्टी) से अनिल भारती बमुपा(बहुजन मुक्त‍ि पार्टी) से उमाशंकर आम अधिकार मोर्चा से मनोज कुमार मंडल बलि राजा पार्टी से राजीव कुमार यादव असली देसी पार्टी से सुरेश कुमार भारती और निर्दलीय से 5 उम्मीदवार है| इनमे- मो. अरशद हुसैन, सुमन कुमार झा, राजो साह, विनय कुमार मिश्र और जयकांत यादव का नाम शामिल है| अब एक नजर डालते है इस सीट के इतिहास पर| 1967 से 2014 तक इस सीट पर कुल 14 लोकसभा चुनाव हुवे है जिसमे से 1967, 1968 और 1977 लोकसभा चुनाव में यहां से बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल चुने गए। इसके बाद कांग्रेस से 1971 और 1980 में राजेन्द्र प्रसाद यादव और 1984 में महावीर प्रसाद यादव, जनता दल से 1989 में रमेन्द्र यादव और 1991 में शरद यादव, जदयू से 1999 और 2009 में शरद यादव, राजद से 1998 और 2004 में लालू प्रसाद यादव तथा 2004 (उपचुनाव) और 2014 में पप्पू यादव ने चुनाव जीता था| अगर 1967 से अब तक हुवे चुनावों पर एक नजर डाले तो हम पाते है कि यहाँ से सबसे ज्यादा राजद ने ४ बार चुनाव जीता है| इसके बाद कांग्रेस और जनता दल ने ३-३ बार और जदयू ने दो बार चुनाव जीता है| अगर हम जातीय आधार पर देखे तो 12 बार यहाँ से यादव चुने गए हैं। जिनमे सबसे ज्यादा 4 बार शरद यादव ने यहाँ से जीत हासिल की है| यादव बहुल मधेपुरा सीट पर मुस्लिमों और सवर्णों का भी दबदबा है। यहाँ करीब 22 फीसदी यादव, 13 फीसदी मुस्लिम, 19 फीसदी सवर्ण, 14 फीसदी दलित, 11 फीसदी कुशवाहा और 21 फीसदी वैश्य समुदाय के लोग हैं। इस सीट पर 18,84,216 मतदाता हैं जिनमें 9,74,722 पुरूष और 9,07, 592 महिला वोटर्स हैं। अगर बात करे यहाँ के स्थानीय मुद्दे कि तो भारत द्वारा पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद मधेपुरा में जनता के सारे मुद्दे हवा हवाई हो गए। यहाँ एक तरफ राष्ट्रवाद तो दूसरी तरफ जातीय मुद्दों पर चुनाव लड़ा जा रहा है। शरद यादव इस बार राजद के झंडे पर मैदान में हैं। एनडीए के दिनेशचंद्र यादव और जन अधिकार पार्टी (जाप) के पप्पू यादव से उन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो मधेपुरा लोकसभा सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है। पप्पू यादव ने महागठबंधन में शामिल होने की पूरी कोशिश की लेकिन, तेजस्वी के विरोध के चलते वे शामिल नहीं हो सके। इससे नाराज पप्पू ने जाप से चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया और उनके चुनाव लड़ने की वजह से ही ये मुकबला त्रिकोणीय हो गया है। 23 अप्रैल को इस सीट पर वोटिंग होनी है। यहाँ की चुनावी राजनीति पिछले तीस साल से एक ही धारा पर चल रही है क्योंकि यहां पार्टी भले ही कोई हो विजयी प्रत्याशी एक ही जाति का होता है. इस बार भी इस सीट पर जिन तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच मुकाबला माना जा रहा है, वे भी एक ही जाति के हैं. चुनाव मैदान में एनडीए के जदयू प्रत्याशी दिनेश चंद्र यादव, राजद के शरद यादव और जाप से राजेश रंजन ऊर्फ पप्पू यादव एक-दूसरे को पछाड़ कर रेस में सबसे आगे निकले की होड़ में लगे हैं। अब तो कल की वोटिंग से ही पता चलेगा कि इस चुनावी रेश में जनता किसे जीत दिलाती है| खैर रिजल्ट जो भी हो.......जीत चाहे किसी भी पार्टी की हो........ पर जितिया आधार पर तो जीत यादवों की ही होगी|

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