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Chunav Spl. Bilaspur, कायम रह सकता है पुराना सिलसिला..

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Chunav Spl. Bilaspur, कायम रह सकता है पुराना सिलसिला..

बिलासपुर छत्तीसगढ़ राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है,बिलासपुर शहर लगभग 400 साल पुराना है और इसका नाम मछुआरन महिला 'बिलासा' के नाम पर रखा गया है.अपने खुशबूदार बिलासपुरी चावल , एशिया के सबसे बड़े हाई कोर्ट और मेहनत काश बिलासपुरी लेबर के लिए मशहूर बिलासपुर राजनीती में भी सबसे चर्चित सीट में से एक है ! छत्तीसगढ़ की बिलासपुर लोकसभा सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। बिलासपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटों आती हैं। इनमें से दो अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जिनमें कोटा, तखतपुर, बेलतेरा, लोरमी, बिल्हा, मस्तूरी(एससी), मुंगेली(एससी) और बिलासपुर शामिल है। बिलासपुर लोकसभा सीट पर अब तक कुल 16 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. साल 1952 से 1999 तक बिलासपुर निर्वाचन क्षेत्र मध्य प्रदेश का हिस्सा था. छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इस सीट पर पहली बार साल 2004 में चुनाव हुए. साल 1989 से इस क्षेत्र में बीजेपी का दबदबा रहा है. पिछले आठ में से 7 चुनावों (1991 के अलावा) में बीजेपी ने इस सीट पर जीत का परचम लहराया. बिलासपुर से बीजेपी के पुन्नूलाल मोहले ने लगातार चार बार जीत दर्ज की. छत्तीसगढ़ की बिलासपुर लोकसभा सीट के लिए तीसरे चरण में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. इस सीट पर कुल 25 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यहां से कांग्रेस पार्टी ने अटल श्रीवास्तव, भारतीय जनता पार्टी ने अरुण साव, बहुजन समाज पार्टी ने उत्तम दास गुरू गोसाई, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने नंद किशोर राज, स्वाभिमान पार्टी ने पूरण लाल छाबरिया, भारतीय किसान पार्टी ने यमन बनर्जी, भारतीय लोकमत राष्ट्रवादी पार्टी ने राम कुमार घटलाहरे, अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया ने ईजी रामफाल मंडरे, भारत भूमि पार्टी ने शंभू प्रसाद शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है. बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में जातिगत समीकरण पर गौर करें तो साहू समाज की बहुलता से इन्कार नहीं किया जा सकता । विधानसभा और लोकसभा चुनाव में इस वर्ग के मतदाता प्रभावी भूमिका में नजर आते हैं। भाजपाई रणनीतिकारों ने भी लोकसभा सीट के जातिगत समीकरणों और मतदाताओं के रुझान और पार्टीगत झुकाव पर अपनी अच्छी पकड़ मजबूत कर रखी है

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