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Kedarnath पर फिर होंगे पैदल मार्ग

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Kedarnath पर फिर होंगे पैदल मार्ग

सातवीं-आठवीं सदी में उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय के पहाड़ों पर घनघोर जंगलों के बीच पैदल रास्ता तय करते हुए आदि गुरु शंकराचार्य ने बदरीनाथ में बद्रिकाश्रम ज्योर्तिपीठ और केदारनाथ में ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी. पिछले कुछ दशकों में सड़कें बन जाने के बाद श्रद्धालु समय और शक्ति के लिहाज से खर्चीले इन पारंपरिक पैदल मार्गों से दूर हो गए. बदरीनाथ धाम तक जहां सीधी सड़क जाती है वहीं केदारनाथ के आधार शिविर गौरीकुंड तक भी सड़क की पहुंच है. लेकिन अब अगले महीने चारधाम यात्रा की शुरुआत से पहले उत्तराखंड पुलिस के राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) ने समय की मार से विलुप्त हो गए इन पैदल मार्गों को फिर से खोजने की पहल की है. उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अशोक कुमार ने बताया कि इंस्पेक्टर संजय उप्रेती की अगुवाई में एक 13 सदस्यीय टीम को बदरीनाथ और केदारनाथ के लिए भेजा गया है, जो स्वयं पैदल यात्रा कर उन पारंपरिक मार्गों की तलाश करेगी. इस टीम में दो महिला सदस्य भी हैं. कुमार ने कहा, ‘‘केवल 70 साल पहले तक भी श्रद्धालु पैदल मार्गों से यात्रा करके बदरीनाथ और केदारनाथ धाम पहुंचते थे. लेकिन सड़कें बनने के बाद ये मार्ग धीरे-धीरे विलुप्त हो गए. हमने उन्हें पुन: खोजने की पहल की है.'’ एसडीआरएफ की टीम ने अपनी यात्रा की शुरुआत 20 अप्रैल को धार्मिक शहर ऋषिकेश के पास स्थित लक्ष्मणझूला क्षेत्र से की थी और अब वह गंगा नदी के साथ-साथ करीब 160 किलोमीटर की दूरी तय कर रुद्रप्रयाग पहुंच चुकी है.

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