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World Asthma Day : सवाल अपनी सांसों का है

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World Asthma Day : सवाल अपनी सांसों का है

अस्थमा के कारणों की चर्चा की जाए तो बढ़ती धूल व धुआं और घटती हरियाली प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा धूम्रपान की बढ़ती प्रवृत्ति, धूल के उठते गुबार, औद्योगिक इकाइयों व वाहनों से होने वाला वायु प्रदूषण भी अस्थमा के रोगियों की संख्या बढ़ा रहा है। इन कारणों से हवा में घुलती कार्बन डाई ऑक्साइड व सल्फर डाई ऑक्साइड श्वसन संबंधी परेशानियों को बढ़ावा देती हैं। खान-पान की बात करें तो जंकफूड, टीनफूड, खाद्य पदार्थों में रंगों का होना व तबीयत बिगड़ने पर उपचार नहीं कराना रोग बढ़ाने की वजहों में शामिल हैं। आज इस बीमारी को होने से पहले ही रोका जा सकता है और यदि श्वास संबंधी रोग हो भी जाए तो उसे दूर किया जा सकता है। वर्तमान में चिकित्सा विज्ञान इस रोग से लड़ने में पूर्णतः सक्षम है। अब ऐसी दवाइयां और उपचार पद्धति भी आ चुकी हैं जिसके दुष्प्रभाव शरीर पर बिलकुल नहीं पड़ते। इसके लिए आवश्यक है लोगों का जागरूक होकर उपचार कराना। बात अगर बीमारी की रोकथाम की करें तो सरकार को चाहिए कि हरियाली बढ़ाई जाए और सभी जगह एक साथ सड़कों की खुदाई करने के बजाए क्रमवार कार्य किया जाए ताकि धूल की समस्या रोग का कारण न बन पाए। अस्थमा की शुरुआत बचपन से ही हो जाती है। अमूमन 4 से 11 साल की उम्र से ही यह समस्या शुरू हो जाती है। इसकी वजह एलर्जी, प्रदूषण और वंशानुगत हो सकती है। बच्चों को इससे बचाने के लिए घर के भीतर किसी तरह का प्रदूषण न होने दें, उनके कमरों को साफ रखें, बच्चों को शुद्ध हवा में ले जाएं, हानिकारक खिलौने, बॉक्सनुमा पलंग, जंकफूड आदि से बच्चों को दूर रखें। अस्‍थमा फेफड़ों की एक बीमारी है जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। अस्थमा होने पर श्वास नलियों में सूजन आ जाती है जिस कारण श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। श्वसन नली में सिकुड़न के चलते रोगी को सांस लेने में परेशानी, सांस लेते समय आवाज आना, सीने में जकड़न, खांसी आदि समस्‍याएं होने लगती हैं। इससे बच के रहे, सावधानियां बरतें और सदा स्वस्थ रहे.

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