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Chunav SPL. उत्‍तर पूर्वी दिल्‍ली कौन होगा विजेता?

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Chunav SPL. उत्‍तर पूर्वी दिल्‍ली कौन होगा विजेता?

लोकसभा चुनाव की विशेष कवरेज में आज बात देश की राजधानी नई दिल्ली की, भारत के सबसे बडे शहरों में से एक दिल्ली, प्राचीनता और आधुनिकता का सही संयोजन है, राजधानी दिल्ली का क्षेत्रफल 1,484.0 वर्ग किमी है, मंत्रमुग्ध कर देने वाली नई और पुरानी दिल्ली के मिश्रण में, आपको भारत का इतिहास, संस्कृति और विस्मित चीजों का संकलन मिलेगा। यह केवल देश की राजधानी ही नहीं बल्कि राजनीतिक गतिविधियों की भी राजधानी है, इतिहास गवाह है कि मुगल हों या फिर अंग्रेज, सभी को दिल्ली बेहद ही रास आई, यह महाभारत काल मे पांडवों की राजधानी हुआ करती थी, तब इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्‍ली की पूर्वी दिल्‍ली लोकसभा सीट से अलग कर बनाई गई उत्‍तर पूर्वी लोकसभा सीट दिल्‍ली की प्रमुख सीटों में से एक है. इस सीट पर १२ मई को मतदान होगा | इस सीट के खास होने की दो वजह हैं. पहली यह कि यह देश के अलग-अलग हिस्‍सों से आए प्रवासी भारतीयों का गढ़ है, दूसरी यह सबसे घनी आबादी वाली लोकसभा सीट है. इसके अंतर्गत विधानसभा की 10 सीटे आती हैं जिनमें- सीमापुरी, गोकलपुरी, घोंडा, सीलमपुर, रोहतास नगर, बाबरपुर, करावल नगर, बुराड़ी, तिमारपुर, मुस्तफाबाद शामिल हैं. इनमे नौ सीटों पर 'आप' का कब्जा है, जबकि एक सीट मुस्तफाबाद पर भाजपा के विधायक है। अगर समीकरण की बात करे तो 2011 की जनगणना के मुताबिक यहाँ की कुल जनसंख्या 22,41,624 है| और कुल मतदाताओं की संख्या 19,57,707 है| जिसमे 10,79,406 पुरुष और 8,78,301 महिला मतदाता है| इस सीट की चाबी मुस्लिम और पूर्वांचली समाज के पास है। बड़ी संख्या में दलित वोटर भी इस सीट पर हैं। देहात के चलते गुर्जर वोटरों का भी इस सीट पर काफी प्रभाव है। अगर यहाँ के राजनैतिक मुद्दों पर नजर डाले तो यहां जातीय समीकरण के साथ-साथ प्रवासी आबादी और अनधिकृत कॉलोनियां प्रमुख मुद्दा है. अनधिकृत कॉलोनियों में बिहार, यूपी और अन्‍य राज्‍यों से आए लोग रह रहे हैं. ऐसे में प्राथमिक और जमीनी समस्‍याओं को खत्‍म, अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत करना और उनका विकास करना यहां की प्रमुख मांगें हैं. अगर यहां के इतिहास की बात करें, तो ये लोकसभा सीट नये परिसीमन के चलते 2008 में यह सीट अस्तित्‍व में आयी। और 2009 में कांग्रेस के जेपी अग्रवाल यहां से पहले सांसद बने। उस दौरान कांग्रेस का वोट शेयर 59 प्रतिशत था, जो 2014 में गिर कर महज 16 फीसदी रह गया और कांग्रेस खिसक कर तीसरे नंबर पर आ गई। अरविंद केजरीवाल के असर के चेलते आप पार्टी ने 34 फीसदी तक वोट जुटाये, जबकि भाजपा 11 प्रतिशत के उछाल के साथ 45 फीसदी वोट खींचने में कामयाब रही। 2014 में इस सीट से BJP के मनोज तिवारी ने जीत हासिल की थी. उन्हें 5,96,125 वोट मिले थे, जबकि AAP के आनंद कुमार 4,52,041 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थे. वर्तामान सांसद मनोज तिवारी की संसद में कुल उपस्थिति 79 प्रतिशत है| जबकि प्रश्‍न पूछने के मामले में वह काफी आगे रहे। उन्‍होंने कुल 239 सवाल पूछे। जो कि राज्‍य के 290 और देश के 273 सवालों के औसत के मुकाबले ठीक-ठाक कहा जायेगा। यह था सदन के भीतर मनोज तिवारी का प्रदर्शन अब अगर क्षेत्र में जायें, तो उन्‍होंने 25 करोड़ की आवंटित सांसद निधि का भरपूर इस्‍तेमाल किया। तमाम विकास कार्य करवाये। और तो और उन्‍होंने केंद्र से उत्तर-पूर्वी दिल्‍ली के लिये 15 करोड़ अतिरिक्‍त धनराशि की मांग भी की। उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट इस बार सबसे हाईप्रोफाइल हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी इस सीट पर दोबारा अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। उधर कांग्रेस ने तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रही और प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित को मैदान में उतारा है। आम आदमी पार्टी से पूर्वांचली चेहरा दिलीप पांडे चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार चुनाव में यहां पर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा| इसके साथ ही चूंकि यह सीट नई है और दो बार के चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी ने एक-एक बार जीत दर्ज की है| वोट मीटर की सुई बहुत तेजी से अलग-अलग पार्टियों की ओर घूम रही है। मीटर में फ्लक्‍चुएशन बरकरार है, जिसके चलते तमाम नेताओं की नींदें उड़ी हुई हैं। ऐसे में इस बार चुनाव परिणामों के बाद ही यहां के लोगों का मूड समझ पाना संभव होगा. पिछली बार की तरह इस बार भी बाजी पलटेगी या नहीं, यह दिल्‍ली उत्तर पूर्वी की जनता तय करेगी।

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