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मोदी 2.0 Special : कुछ ऐसी हो सकती है cabinet की तस्वीर

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मोदी 2.0 Special : कुछ ऐसी हो सकती है cabinet की तस्वीर

'मोदी है तो मुमकिन है' से लेकर 'आएगा तो मोदी ही' के नारों के साथ चले प्रचार कैंपेन के बाद भाजपा ने 'अबकी बार 300 पार' का लक्ष्य साकार कर लिया। प्रचंड बहुमत के साथ देश की जनता ने 17वीं लोकसभा के लिए देश की बागडोर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में सौंप दी। मोदी के नाम पर और राष्ट्रवाद की लहर में इस बड़ी जीत के बाद देश भर में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच जश्न का माहौल है। वहीं दूसरी ओर 'मोदी 2.0' सरकार में नए कैबिनेट को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। मोदी कैबिनेट में इस बार कई नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, वहीं कुछ पुराने चेहरों को आराम दिया जा सकता है। इसी के साथ पार्टी के नए अध्यक्ष का नाम भी जल्द ही तय किया जा सकता है। भाजपा की इस बड़ी जीत के बाद मोदी कैबिनेट के कई मंत्रियों के मंत्रालय बदले जा सकते हैं, वहीं जीत में अहम भूमिका निभाने वाले नेताओं को अहम जगह मिल सकती है। प्रधानमंत्री के पद के बाद गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय जैसे अहम मंत्रालयों पर सबकी नजर रहती है कि यहां किसे जगह मिलेगी। मोदी कैबिनेट में गुजरात के गृह मंत्री रह चुके अमित शाह भाजपा की इस शानदार जीत में एक बार फिर 'चाणक्य' के तौर पर उभरे हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश में शानदार जीत के बाद लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी शानदार रणनीति और मेहनत का प्रदर्शन किया है। ऐसे में उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाकर इनाम दिया जा सकता है। उन्हें गृह मंत्रालय सौंपे जाने की चर्चा जोरों पर है। ऐसा हुआ तो फिर राजनाथ सिंह का मंत्रालय बदल जाएगा। भाजपा की पारंपरिक सीट गुजरात के गांधीनगर से रिकॉर्ड जीत दर्ज करने वाले अमित शाह को अगर गृह मंत्री बनाया जाता है तो पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी खाली होगी। ऐसे में भाजपा का अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर भी सियासी चर्चा जोरों पर है। भाजपा की शानदार जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में जीत के जश्न के दौरान पीएम मोदी और शाह के साथ राजनाथ सिंह तो थे ही, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा भी मंच साझा करते दिखे थे। ऐसे में एक चर्चा जेपी नड्डा को यह अहम जिम्मेदारी दिए जाने की भी है। वहीं पार्टी की कमान सौंपे जाने को लेकर दूसरी चर्चा नितिन गडकरी के नाम की भी है। अटल सरकार में भी कद्दावर नेत्री रहीं और फिर मोदी सरकार में भी अहम नेत्री रहीं सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री के तौर पर शानदार परफॉर्मेंस करने वालों में रही हैं। उनकी उम्र भी हो चली है और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। विदेश मंत्री के तौर पर विदेश की यात्राओं के दौरान उनका स्वास्थ्य उनके काम के आड़े आता रहता है। ऐसे में सुषमा के विदेश मंत्रालय छोड़ने पर कोई ताज्जुब नहीं होगा। पिछले पांच सालों में हर मोर्चे पर सफलता का दावा करने वाली मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर न केवल विपक्ष के, बल्कि अर्थशास्त्रियों और आलोचकों के भी निशाने पर रही है। ऐसे में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी और बढ़ेगी। अरुण जेटली एक समय 'योग्य' रहे हों, लेकिन पिछले लंबे समय से उनका स्वास्थ्य बहुत ठीक नहीं रहता है। जेटली का जब इलाज चल रहा था तो पीयूष गोयल वित्त मंत्रालय का काम संभाल रहे थे। मोदी सरकार के अंतरिम बजट के दौरान उन्होंने ही वित्त मंत्री की भूमिका निभाई। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि गोयल को वित्त मंत्रालय सौंपा जाए और जेटली के स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें राज्यमंत्री बना दिया जाए या फिर कोई हल्का मंत्रालय दिया जाए।

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