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Weekly Analysis : कहीं हार न पची तो कही जीत पर विश्वास न हुआ

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Weekly Analysis : कहीं हार न पची तो कही जीत पर विश्वास न हुआ

विश्वास की लौ जला कर ,विकास का दीपक लेकर ! सपनो को साकार करने ,अभी तो सूरज उगा है! ना अपना ना पराया, ना तेरा ना मेरा! सबका तेज बन कर अभी तो सूरज उगा है! नरेन्द्र मोदी ने अपनी इस कविता से अपने इरादे स्पष्ट कर दिये वो सूरज की तरह भारत की राजनीति चमकेगें सबका साथ सबका विकास और अब सबका विश्वास का मंत्र उनकी सरकार की प्रथमिकता रहेगी ! लगभग एक महीने से ऊपर चले चुनाव कार्यकम के बाद देश को 17 लोकसभा और नयी सरकार मिल गई देश के नए मंत्रिमंडल के गठन के बीच मैं हूँ आरती हिन्द और आप सुन रहे है ..... चुनाव का दौर ख़त्म हो गया एक तरफ़ मंत्री मण्डल का गठन तो दूसरी तरफ़ इस्तीफों का दौर जारी है जो हार गए है वो हार पचा नहीं पा रहे है तो दूसरी तरफ़ कई ऐसे भी जो जीत पर विश्वास नहीं कर पा रहे है ! जो हार नहीं पचा पा रहे है उसमे सबसे प्रमुख है ममता बनर्जी उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा की कभी बीजेपी बंगाल में पैर जमा सकती है और तो और उनकी आखों में आखें डाल बराबर की टक्कर दे सकती है !

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