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Special : भारत में लेदर बैग से शुरू हुआ था बजट

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Special : भारत में लेदर बैग से शुरू हुआ था बजट

1947 में अंग्रेजों से तो भारत को आजादी मिल गई लेकिन बजट की परंपरा अंग्रेजों वाली ही रही. देश के पहले वित्त मंत्री आर.के शानमुखम चेट्टी ने जब 26 जनवरी 1947 को पहली बार बजट पेश किया तो वह भी एक लेदर के थैले के साथ संसद पहुंचे. इसके बाद कई सालों तक इसी परंपरा के साथ बजट पेश होता रहा. 1958 में यह परंपरा बदली और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने काले रंग के ब्रीफकेस में बजट पेश किया. इसके बाद जब 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने बजट पेश किया तो ब्रीफकेस का रंग बदलकर लाल कर दिया गया. तब से ही लाल ब्रीफकेस में बजट पेश किया जाता रहा है. यहां तक कि 1 फरवरी 2019 का अंतरिम बजट भी पीयूष गोयल ने लाल ब्रीफकेस में ही पेश किया था. मगर, इस बार मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट लेकर आईं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के हाथ में लाल ब्रीफकेस की जगह बजट के दस्तावेज लाल मखमली कपड़े में लिपटे नजर आए. ऐसा पहली बार हुआ है जब लेदर का बैग और ब्रीफकेस दोनों ही सरकार के बजट से गायब हो गए हैं. बजट की इस नई परंपरा को बही-खाता बताया जा रहा है. मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम ने कहा है कि यह भारतीय परंपरा है जो गुलामी व पश्चिम के विचारों से भारत की आजादी को प्रदर्शित करती है. सुब्रमण्यम ने ये भी कह दिया कि यह बजट नहीं, बही-खाता है. यानी फ्रैंच भाषा के बुजेट शब्द के आधार पर लैदर बैग और सूटकेस में पेश किए जाने वाले आर्थिक खाके को बजट का जो नाम दिया गया उसे अब बही-खाता कहा जा रहा है.

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