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हिमाचल की राजधानी और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शिमला में आतंक का पर्याय बने बंदरों को मारने की केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने अनुमति दे दी है। ये मंजूरी एक साल के लिए सशर्त दी गई है। यह कदम लघु पुच्छ वानर प्रजाति के इन बंदरों की बेतहाशा बढ़ती संख्या और आतंक को देखते हुए राज्य सरकार के अनुरोध पर उठाया गया है। इसको लेकर मंत्रालय ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। प्रदेश सरकार ने अपने आग्रह में कहा था कि ये बंदर शिमला शहरी क्षेत्र के लोगों की जानमाल के लिए खतरा बन गए हैं। बंदरों के आतंक के चलते लोगों को चलना फिरना और रहना मुश्किल हो गया है। बंदर बड़े पैमाने पर फसलों और संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हिमाचल के डेढ़ दर्जन निजी अस्पताल का इंपेनलमेंट खत्म हो गया है। अब इन अस्पतालों में प्रदेश के सरकारी कर्मचारी, पेंशनर और मृतक के आश्रित इलाज के पैसे का भुगतान नहीं होगा। स्वास्थ्य सुरक्षा विनियमन निदेशालय ने प्रदेश के 90 अस्पतालों की इंपेनलमेंट की है। जहां पर सरकारी कर्मचारी अपना इलाज करा सकते थे। इसमें 41 अस्पताल ऐसे है जिनके इंपेनलमेंट खत्म हुए अभी दो से ढाई महीने हो गए हैं निदेशालय ने इन्हें तीन महीने के भीतर अपना इंपेनलमेंट करने को कहा है जबकि 14 अस्पताल ऐसे है जिनको तीन महीने से ज्यादा समय हो गया है। अब यह अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के इंपेनलमेंट की सूची से बाहर गए हैं। करीब 18 हजार फीट ऊंचाई पर स्थित थमसर जोत के बाद आने वाले कांगड़ा जिले के अति दुर्गम गांव बड़ा भंगाल का पैदल रास्ता एक साल बाद बहाल हो गया है। पिछली बरसात के बाद भारी भूस्खलन के चलते बड़ा गांव से बड़ा भंगाल को जाने वाला पैदल रास्ता बंद हो गया था। इससे बड़ा भंगाल देश-दुनिया से कट गया। करीब एक माह पहले दुर्गम घाटी के कुछ लोगों ने सीएम के समक्ष पैदल रास्ते को दुरुस्त करने की मांग रखी थी।

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