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Special: राष्ट्रपति के अंगरक्षकों में केवल तीन जातियां ही क्यों?

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Special: राष्ट्रपति के अंगरक्षकों में केवल तीन जातियां ही क्यों?

इसके जवाब के लिए इस टीम के इतिहास की ओर जाना होगा. सिडेंट्स बॉडी गार्ड (PBG) का इतिहास बहुत पुराना है. PBG का मौजूदा स्वरूप 1773 में गवर्नर वॉरेन हेस्टिंग्स ने बनाया था उन्हें 'मुगल हॉर्स' कहा जाता था. मुगल हॉर्स का गठन 1760 में सरदार मिर्जा शाहबाज़ खान और सरदार खान तार बेग ने किया था उसी साल बनारस के राजा चैत सिंह ने 50 अन्य सिपाहियों को भेजा, जिससे राष्ट्रपति अंगरक्षक की टुकड़ी 100 का आंकड़ा छू गई. 1773-1780 तक इन्हें ट्रूप्स ऑफ मुगल (The Governor’s* Troops of Moghals) कहा जाता था. 1784 से 1859 तक उन्हें गवर्नर जनरल बॉडी गार्ड (GGBG) कहा जाता था, 1859 से 1944 में उनका टाइटल बदलकर 44th डिविजनल रिकॉनेसां स्क्वाड्रन (44th Divisional Reconnaissance Squadron, GGBG) हो गया था. इसके दो साल बाद 1946 में ये वापस से गवर्नर जनरल बॉडी गार्ड कहलाने लगे. 1947 में आजादी के बाद ये टुकड़ी दो भागों में विभाजित हो गई. एक पाकिस्तान गई और एक भारत में रही. 1950 में इन्हें मौजूदा नाम मिला जो President's Bodyguard कहलाता है. इस टुकड़ी का इतिहास 250 साल पुराना है.

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